अमृता राव ने ‘मैं हूँ ना’ की खासियतों पर बताई दिल छू लेने वाली बातें, जानिए क्यों आज ऐसी फिल्में कम बनती हैं
अमृता राव ने फिल्म ‘मैं हूँ ना’ की खासियतों पर कई दिल छू लेने वाले पहलुओं को साझा किया है। उन्होंने बताया कि उस दौर की फिल्मों में सपनों, उम्मीदों और भावनाओं को बखूबी दिखाया जाता था, जो आज के जमाने में कम देखने को मिलता है।
उनके अनुसार, ‘मैं हूँ ना’ जैसी फिल्में अपने समय की एक मिसाल थीं, जिनमें परिवार, दोस्ती, और रिश्तों की अहमियत को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया। वे बताती हैं कि वर्तमान में फिल्मों का ट्रेंड अधिकतर दिखावे और ग्राफिक्स की तरफ बढ़ गया है, जबकि उस समय की फिल्मों में कहानी और भावनाओं को ज्यादा महत्व दिया जाता था।
ऐसी फिल्में कम बनने के कारण
- व्यापारिक दबाव: फिल्मों में आर्थिक पक्ष का दबाव अधिक होने से जोखिम भरी कहानियां कम बनती हैं।
- तकनीकी बदलाव: वर्तमान में दर्शकों की रूचि बदल गई है और वे अधिक आकर्षक विजुअल्स चाहते हैं, जिससे भावनात्मक कहानियां पीछे छूटती हैं।
- सामाजिक परिवर्तनों का प्रभाव: बदलती सामाजिक सोच के कारण पारंपरिक रिश्तों पर आधारित फिल्मों का बनना मुश्किल हो गया है।
अमृता राव के विचार
अमृता राव का मानना है कि इस प्रकार की फिल्मों की कमी महसूस होती है और वे चाहती हैं कि फिल्म निर्माता ऐसी कहानियां फिर से लेकर आएं जो लोगों के दिलों को छू सकें और जिनमें साझा मानवीय भावनाएं हो। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज को जोड़ने का काम भी करती हैं।