पंकज त्रिपाठी की नई पहल: बेटी आशि त्रिपाठी के साथ रंगमंच पर कदम

पंकज त्रिपाठी, जो बॉलीवुड में अपने अनोखे अभिनय के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में अपनी एक नई पहल की शुरुआत की है। यह पहल उनके द्वारा स्थापित रंगमंच कंपनी ‘रूपकथा रंगमंच’ के तहत पहली प्रस्तुति है, जिसका नाम है ‘लैलाज’। इस मंचीय नाटक को विशेष बनाने वाली बड़ी बात यह है कि यह नाटक पंकज त्रिपाठी की बेटी आशि त्रिपाठी का रंगमंच पर डेब्यू भी है।

क्या हुआ?

पंकज त्रिपाठी ने भारतीय रंगमंच कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘रूपकथा रंगमंच’ की स्थापना की है। इस मंचीय कंपनी के तहत ‘लैलाज’ नामक म्यूजिकल-कॉमेडी नाटक को प्रस्तुत किया गया। यह नाटक न केवल एक मनोरंजक प्रस्तुतिकरण है बल्कि इसने पंकज त्रिपाठी के परिवार की एक नई पीढ़ी को मंच पर पेश किया है। उनकी बेटी आशि त्रिपाठी ने इस नाटक के जरिए अपने अभिनय करियर की शुरुआत की है, जो उनके लिए और उनके प्रशंसकों के लिए एक बड़ी ख़ुशी की बात है।

पृष्ठभूमि क्या है?

पंकज त्रिपाठी ने फिल्मों के साथ-साथ थिएटर में भी अपनी खास पहचान बनाई है। वे पहले भी कई थियेटर प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने खुद की रंगमंच कंपनी शुरू कर इसे औपचारिक रूप दिया है। भारत में म्यूजिकल-कॉमेडी जैसी विधाओं का रंगमंच पर नया दौर है, और ‘लैलाज’ इस शैली में एक नया अध्याय जोड़ता है। साथ ही, पंकज त्रिपाठी की यह पहल युवा कलाकारों, विशेषकर परिवार की अगली पीढ़ी को मंच देते हुए इंडस्ट्री में नए अवसर बनाने का संदेश देती है।

पहले भी ऐसा हुआ था?

बॉलीवुड में कई कलाकारों ने अपनी अगली पीढ़ी को फिल्मी दुनिया में लाने की कोशिश की है, लेकिन थिएटर के क्षेत्र में पारिवारिक सहयोग कम देखने को मिलता है। पंकज त्रिपाठी के लिए यह कदम खास इसलिए भी है क्योंकि यह पारिवारिक जुड़ाव के साथ पेशेवर समर्पण का उदाहरण है।

इस संदर्भ में:

  • कई कलाकारों ने थिएटर की शुरुआत की है।
  • म्यूजिकल-कॉमेडी प्रोडक्शन और पारिवारिक डेब्यू की खबरें कम ही आई हैं।
  • यह पहल इसलिए भी खास बन जाती है।

फिल्म इंडस्ट्री पर असर

पंकज त्रिपाठी की यह पहल बॉलीवुड और रंगमंच के बीच के संबंधों को और मजबूत कर सकती है। इससे पता चलता है कि कलाकार सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे थिएटर के माध्यम से भी कला का प्रचार-प्रसार कर सकते हैं। साथ ही, यह नए कलाकारों के लिए भी एक मिसाल है कि परिवार के सहयोग से कला के विविध रूपों को अपनाया जा सकता है।

इंडस्ट्री में जहां फिल्मों का दबदबा है, वहां इस तरह के थिएटर प्रोजेक्ट्स:

  1. इंडस्ट्री की बहुलता को बढ़ावा देते हैं।
  2. गुणवत्तापरकता को प्रोत्साहित करते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

रूपकथा रंगमंच की यह शुरुआत एक सकारात्मक संकेत है कि भविष्य में भी इस तरह के और प्रोडक्शन देखने को मिल सकते हैं। पंकज त्रिपाठी का अनुभव और आशि त्रिपाठी का ताजा जोश मिलकर भारतीय रंगमंच को नई दिशा दे सकता है।

इसके साथ ही, यह पहल और कलाकारों को प्रोत्साहित कर सकती है कि वे फिल्मों के अलावा थिएटर को भी अपने कैरियर का अहम हिस्सा बनाएं। उम्मीद की जा सकती है कि जल्द ही ‘लैलाज’ जैसे नाटक बड़े मंचों और शहरों तक पहुंचेंगे, जिससे व्यापक दर्शक वर्ग इससे जुड़ पाएगा।

निष्कर्ष

संक्षेप में, पंकज त्रिपाठी की ‘रूपकथा रंगमंच’ और उनकी बेटी आशि का रंगमंच डेब्यू भारतीय कला जगत के लिए स्वागत योग्य समाचार है। यह पहल बॉलीवुड के कलाकारों में थिएटर की महत्ता को दर्शाती है और आने वाले समय में इस तरह की नवाचारों के लिए राह प्रशस्त करती है।

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