21 साल के अधिकारी अरुण खेत्तड़पाल की बहादुरी पर बनी नई फिल्म ‘इक्कीस’ ने दिल जीता, क्या बदलेंगे युद्द नायकों के स्वरूप?
नई फिल्म ‘इक्कीस’ 21 साल के अधिकारी अरुण खेत्तड़पाल की बहादुरी को दर्शाती है, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया है। इस फिल्म ने युद्ध नायकों के पारंपरिक स्वरूप पर सवाल उठाए हैं और एक नए तरह के नायक को पेश किया है, जो केवल शारीरिक ताकत से नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता और रणनीति से भी संपन्न है।
युद्ध नायकों के स्वरूप में संभावित बदलाव
फिल्म ‘इक्कीस’ के जरिए यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध नायकों की छवि अब बदल रही है। जहां पहले नायक की छवि शारीरिक शक्ति और साहस के रूप में जानी जाती थी, वहीं अब यह छवि इन गुणों के साथ-साथ सूझ-बूझ, नेतृत्व क्षमता और मानवीय संवेदनाओं को भी समेटे हुए है।
इस बदलाव के प्रमुख पहलू हैं:
- युद्ध नायकों में युवाओं की भागीदारी और उनकी नई सोच को अहमियत देना।
- सामरिक कौशल और तकनीकी ज्ञान को उनकी व्यक्ति विशेष की विशेषता मानना।
- युद्ध के साथ-साथ शांति स्थापना और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देना।
अरुण खेत्तड़पाल जैसे नायक का चित्रण युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहा है, जिससे यह संभावना बनती है कि भविष्य में युद्ध नायीकों का स्वरूप अधिक समृद्ध और विविध होगा।