रानी मुखर्जी ने खोले अपने दर्द के राज़, कैसे ‘मिसेज़ चटर्जी vs नॉर्वे’ ने दिया सहारा?
रानी मुखर्जी ने हाल ही में अपने दर्द के राज़ खोले और बताया कि कैसे उनकी फ़िल्म ‘मिसेज़ चटर्जी vs नॉर्वे’ ने उन्हें सहारा दिया। इस फिल्म ने न केवल उनके पेशेवर जीवन को नया आयाम दिया, बल्कि उनके व्यक्तिगत संघर्षों को भी समझने और उनसे निपटने में मदद की।
रानी मुखर्जी का दर्द और संघर्ष
रानी मुखर्जी ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि कुछ समय तक उन्हें मानसिक और भावनात्मक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौर में, उनकी फ़िल्में उनके लिए एक सहारा बनीं और उन्हें अपने दर्द को व्यक्त करने का माध्यम मिली।
‘मिसेज़ चटर्जी vs नॉर्वे’ का महत्व
यह फ़िल्म रानी के लिए केवल एक प्रोजेक्ट नहीं थी, बल्कि एक सशक्त माध्यम थी जहां उन्होंने अपनी सोच को व्यक्त किया। इस फ़िल्म ने उन्हें:
- अपने दर्द और अस्मिताओं को समझने में मदद की।
- स्वयं को मजबूत बनाने की प्रेरणा दी।
- अपने अनुभवों को कला के माध्यम से साझा करने का अवसर प्रदान किया।
रानी मुखर्जी की प्रेरणा
रानी की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह भी कहना कि जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए अगर सही दिशा में कदम बढ़ाएं तो सफलता और शांति दोनों हासिल की जा सकती हैं।
इसलिए, ‘मिसेज़ चटर्जी vs नॉर्वे’ उनकी जिंदगी में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जिसने उन्हें न केवल सहारा दिया बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया।