टॉलीवुड में पहचान की जंग: आदिवि शेष ने बताया नेपोटिज्म और परिवारों का अहम रोल
मॉलीवुड के गॉसिप और खबरों के बीच, टॉलीवुड में एक नई बहस छिड़ गई है, जिसमें अभिनेता आदिवि शेष ने नेपोटिज्म और परिवारों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने फिल्म उद्योग में पहचान बनाने की कठिनाईयों और परिवारों के प्रभाव पर खुलकर चर्चा की है।
नेपोटिज्म और टॉलीवुड का सच
आदिवि शेष ने कहा है कि टॉलीवुड में परिवारों का बड़ा प्रभाव है, जो नई प्रतिभाओं के लिए रास्ते को मुश्किल बना देता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे सिनेमाई उद्योग में सिर्फ परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे नई प्रतिभाओं को अवसर मिलना कठिन हो जाता है।
पहचान की जंग
इस पर उन्होंने जोर दिया कि किसी भी कलाकार को अपनी काबिलियत से साबित होना चाहिए, न कि अपने परिवार या संबधों के सहारे। टॉलीवुड में पहचान पाने के लिए कड़ी मेहनत और लगन जरूरी है, क्योंकि परिवारों का दबदबा इस क्षेत्र में काफी प्रभावशाली है।
आदिवि शेष के विचार
- प्रतिभा अहम: उन्होंने कहा कि प्रतिभा ही सबसे बड़ी पूंजी है।
- परिवारों का दबदबा: परिवार के कारण युवा कलाकारों के सामने कई बाधाएं आती हैं।
- नए अवसर: अभिनय क्षेत्र में नए और प्रतिभाशाली कलाकारों को ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी काबिलियत को सही मायने में परखा जाए।
टॉलीवुड में नेपोटिज्म जैसे मुद्दे पर इस तरह की चर्चा कलाकारों के लिए नए मार्ग खोल सकती है और फिल्म उद्योग में बदलाव की संभावना को बढ़ावा दे सकती है।