ऑटो ड्राइवरों की नई किराया नीति ने यात्रियों में उठाए सवाल, क्या बदलेंगे नियम?

उत्तर मुंबई के उलवे में हाल ही में ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा किराए तय करने की स्वतंत्रता को लेकर यात्रियों में असंतोष उभर रहा है। स्थानीय निवासियों की मानें तो ऑटो चालक अपनी मर्जी से किराया निर्धारित करते हैं और अधिक शुल्क मांगने पर या अगर यात्री उनसे बात करते हैं तो वे सफर करने से मना कर देते हैं। यह स्थिति वहां के रहने वालों के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है।

पृष्ठभूमि क्या है?

मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई हिस्सों में ऑटो रिक्शा किराया को लेकर लंबे समय से विवाद होते रहे हैं। सरकार ने भले ही निर्धारित दरें तय की हों, लेकिन इधर कई स्थानों पर चालक अपने हिसाब से वाहनों का किराया निर्धारित कर देते हैं। उलवे क्षेत्र की यह समस्या किसी नई घटना से जुड़ी नहीं है, बल्कि कोरोना महामारी के बाद तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण ज्यादातर चालकों द्वारा किराये में बढ़ोतरी की गुंजाइश मांगी जा रही है।

पहले भी ऐसा हुआ था?

मुंबई में पिछली बार भी कई बार ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों ने किराए बढ़ाने की मांग की थी। खास तौर पर त्योहारों और सर्दियों की छुट्टियों में इस तरह के मामले सामने आए थे, जब यात्रियों ने शिकायत की कि चालक किराया लेकर सफर करने से इनकार कर देते हैं या फिर मनमानी रकम लेते हैं। पिछले वर्षों में भी इस तरह के विवाद के सिलसिले सरकारी अधिकारियों और ड्राइवर संघों के बीच बैठकें कराने तक पहुँच गए हैं।

फिल्म इंडस्ट्री पर असर

हालांकि यह विवाद सीधे तौर पर बॉलीवुड या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से संबंधित नहीं है, लेकिन मुंबई फिल्म उद्योग के लिए यह एक महत्वपूर्ण बात है क्योंकि यहाँ रोजाना कलाकार, तकनीशियन और अन्य कर्मचारी ऑटो का उपयोग करते हैं। अगर यह समस्या बढ़ती है, तो कलाकारों के दैनिक आवागमन में परेशानी उत्पन्न हो सकती है जो फिल्म निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। साथ ही यह स्थिति शहर की छवि पर भी असर डालती है, जहाँ फिल्म उद्योग के सभी पहलू संचालित होते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को इस मामले पर ध्यान देते हुए चालकों और यात्रियों के बीच संवाद स्थापित करना होगा।

  • किराया निर्धारण के विषय में नियमों की कड़ाई से पालना जरूरी होगा।
  • शिकायत निवारण तंत्र का सुदृढ़ीकरण आवश्यक होगा।
  • डिजिटल मेटर और ऐप आधारित ऑटो सेवा जैसे विकल्प बढ़ाने की आवश्यकता दिखाई दे रही है ताकि यात्रियों को सुविधा और पारदर्शिता मिल सके।

सारांश

उलवे में ऑटो किराए को लेकर उत्पन्न विवाद न केवल यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, बल्कि शहर के परिवहन तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। यह आवश्यक होगा कि प्रशासन और वाहन चालकों के बीच समंजस बैठाकर उचित समाधान निकाला जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ और किफायती यात्रा मिल सके।

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